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बड़े घर की बेटी

ICSE Class 10 Hindi • Sahitya Sagar (Stories) • Chapter 6

bade ghar ki beti family

पाठ का परिचय (Introduction):

'बड़े घर की बेटी' मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरणादायक कहानी है। यह कहानी भारतीय संयुक्त परिवार (Joint Family) के क्लेश, टूटन और अंततः एक 'बड़े घर' (खानदानी और संस्कारी) की समझदार बेटी द्वारा उस टूटते हुए परिवार को फिर से जोड़ लेने का सुंदर चित्रण प्रस्तुत करती है। कहानी संदेश देती है कि घर की एकता और शांति बनाए रखना ही किसी संस्कारी स्त्री का सबसे बड़ा आभूषण है।

1. लेखक परिचय (Author Introduction)

रचनाकार: मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand)

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के 'उपन्यास सम्राट' माने जाते हैं। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था। प्रेमचंद जी ने समाज के हर वर्ग (किसान, मज़दूर, स्त्री, ज़मींदार) का यथार्थ चित्रण अपनी कहानियों में किया। उनकी भाषा बहुत सरल और मुहावरेदार है।
प्रमुख रचनाएँ: गोदान, गबन, कर्मभूमि, रंगभूमि (उपन्यास), और मानसरोवर के 8 भागों में संकलित लगभग 300 कहानियाँ (जैसे पंच परमेश्वर, ईदगाह आदि)।

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2. प्रमुख पात्र (Character Sketch)

3. कहानी का सार (Summary)

आनंदी गौरीपुर के ज़मींदार बेनीमाधव सिंह की बड़ी बहू थी। उसके मायके वाले बहुत अमीर थे (वह 'बड़े घर' की बेटी थी), लेकिन ससुराल में आर्थिक स्थिति सामान्य थी। फिर भी आनंदी ने ससुराल के वातावरण में खुद को बहुत अच्छी तरह ढाल लिया था।

एक दिन आनंदी का देवर, लाल बिहारी सिंह, चिड़ियाँ (मांस) लेकर आया और आनंदी से उसे पकाने को कहा। आनंदी ने देखा कि घर में खाने का जो थोड़ा-सा घी था, वह सारा उसने उस मांस में डाल दिया। जब लाल बिहारी खाने बैठा और उसने दाल में घी माँगा, तो आनंदी ने बताया कि सारा घी मांस में डाल दिया गया है और अब घी नहीं है।

यह सुनकर लाल बिहारी भड़क गया। उसने 'बड़े घर' का ताना मारते हुए कहा कि "मायके में तो नदियों में घी बहता है।" आनंदी को अपने मायके का अपमान सहन नहीं हुआ। उसने भी पलटकर कहा कि "गाली मत दो, मायके में इतना घी तो छोटे-मोटे नौकर खा जाते हैं।" यह सुनकर लाल बिहारी आग-बबूला हो उठा। उसने गुस्से में अपनी खड़ाऊँ (लकड़ी का चप्पल) आनंदी पर खींचकर मारी। आनंदी ने हाथ से खुद को बचाया, जिससे उसकी उँगली में गहरी चोट आई।

आनंदी रोती रही और उसने निश्चय किया कि वह इस अपमान की शिकायत अपने पति, श्रीकंठ सिंह से करेगी। शनिवार को जब श्रीकंठ घर आए और आनंदी ने उन्हें सारी बात बताई, तो वे भयंकर क्रोधित हुए। श्रीकंठ हमेशा से 'संयुक्त परिवार' (Joint Family) का समर्थन करते थे, लेकिन भाई की इस हरकत से उन्होंने ठान लिया कि वे अब इस घर में लाल बिहारी के साथ नहीं रहेंगे।

पिता बेनीमाधव ने श्रीकंठ को बहुत समझाया और बहुओं को दोष दिया कि स्त्रियाँ घर का नाश कर देती हैं, लेकिन श्रीकंठ अपनी प्रतिज्ञा पर अडिग रहे। उधर, लाल बिहारी को अपनी गलती का गहरा अहसास हुआ। वह मारे शर्म के किसी को चेहरा नहीं दिखा पा रहा था। जब उसे पता चला कि उसके बड़े भैया घर छोड़कर जा रहे हैं, तो वह घर से बाहर जाने लगा (सदा के लिए घर छोड़ने लगा)।

जब आनंदी ने लाल बिहारी को पश्चाताप करते और घर छोड़ते देखा, तो उसका क्रोध पिघल गया। उसकी खानदानी बड़प्पन जाग उठी। उसने तुरंत श्रीकंठ सिंह को रोका और उन्हें लाल बिहारी को माफ़ करने के लिए मनाया। उसने कहा कि "लाल बिहारी ने जो कुछ किया, मैं उसे भूल चुकी हूँ। आप उसे मत निकालें।"

आनंदी की इस विशाल हृदयता और समझदारी को देखकर श्रीकंठ और लाल बिहारी दोनों रो पड़े। लाल बिहारी ने आनंदी के पैरों में गिरकर माफ़ी माँगी। घर फिर से जुड़ गया। इस दृश्य को देखकर पिता बेनीमाधव सिंह आनंद से बोल पड़े— "बड़े घर की बेटियाँ ऐसी ही होती हैं। बिगड़ा हुआ काम बना लेती हैं।"

4. कहानी के मुख्य उद्देश्य व संदेश (Themes & Message)

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5. महत्वपूर्ण पंक्तियाँ और उनकी व्याख्या (Important References)

"बेटी, बड़े घर की बेटियाँ ऐसी ही होती हैं। बिगड़ा हुआ काम बना लेती हैं।"

प्रसंग: कहानी के अंत में यह बात बेनीमाधव सिंह (आनंदी के ससुर) ने कही, जब आनंदी ने लाल बिहारी को माफ़ करके पूरे परिवार को टूटने से रोक लिया।

व्याख्या: यह पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण वाक्य (Climax) है। बेनीमाधव सिंह, जो पहले आनंदी को ही गलत मान रहे थे, अब उसके संस्कारों के आगे नतमस्तक हो जाते हैं। वे स्वीकार करते हैं कि कुलीन घर की स्त्रियाँ बातों को बिगाड़ती नहीं, बल्कि क्षमा और सूझ-बूझ से बिगड़े हालात (टूटे रिश्तों) को भी संभाल लेती हैं।

"उन्हें सबसे अधिक यही बात नापसंद थी कि घर की स्त्रियाँ पुरुषों के काम में दखल दें।"

प्रसंग: यह टिप्पणी बेनीमाधव सिंह की मानसिकता के बारे में की गई है।

व्याख्या: यह पंक्ति उस समय (और आज भी कई जगहों पर) की पितृसत्तात्मक (Patriarchal) सोच को दर्शाती है, जहाँ माना जाता है कि स्त्रियों को घर के बड़े फैसलों में नहीं बोलना चाहिए और उन्हें हर अन्याय सह लेना चाहिए।

6. परीक्षा उपयोगी प्रश्न-उत्तर (Practice Zone)

BOARD EXAM QUESTIONS

प्रश्न 1: लाल बिहारी और आनंदी के बीच झगड़े का क्या कारण था?

उत्तर: झगड़े का मुख्य कारण खाने में घी का कम होना था। जब लाल बिहारी शिकार करके मांस लाया, तो आनंदी ने घर का सारा घी उसमें डाल दिया। लाल बिहारी ने जब दाल में घी माँगा, तो आनंदी ने कहा कि घी खत्म हो गया है और सारा मांस में डाल दिया। इस पर लाल बिहारी ने उसके 'बड़े घर' का ताना मार दिया, जिसका आनंदी ने कड़ा जवाब दिया। क्रोध में आकर लाल बिहारी ने अपनी खड़ाऊँ खींचकर आनंदी को मार दी, जिससे झगड़ा बहुत बढ़ गया।


प्रश्न 2: श्रीकंठ सिंह संयुक्त परिवार के पक्ष में थे, फिर भी वे अपना घर क्यों छोड़ना चाहते थे?

उत्तर: श्रीकंठ सिंह हमेशा से संयुक्त परिवार (Joint Family) का समर्थन करते थे और गाँव में इसके फायदे गिनाते थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनके छोटे भाई लाल बिहारी ने उनकी पत्नी आनंदी पर खड़ाऊँ (चप्पल) खींचकर मारी है, तो वे इसे बर्दाश्त नहीं कर सके। उन्हें अपनी पत्नी का यह अपमान और ग़ैर-ज़िम्मेदारी असहनीय लगी। उनका मानना था कि जहाँ पत्नी का सम्मान न हो, वहाँ रहना उचित नहीं, इसलिए वे लाल बिहारी के साथ उसी घर में रहने को तैयार नहीं थे।


प्रश्न 3: कहानी के अंत में आनंदी ने अपना कौन सा गुण (बड़प्पन) दिखाया?

उत्तर: आनंदी ने कहानी के अंत में असीम क्षमाशीलता और विशाल हृदयता (विशाल हृदय) का परिचय दिया। जब उसने देखा कि उसके कारण परिवार टूट रहा है और उसका देवर (लाल बिहारी) अपनी गल्ती पर रो रहा है तथा हमेशा के लिए घर छोड़ रहा है, तो उसका क्रोध शांत हो गया। उसने अपने अपमान को भुलाकर अपने देवर को माफ़ कर दिया और अपने पति श्रीकंठ सिंह को भी उसे माफ़ करने के लिए मनाया। इस प्रकार उसने अपने संस्कारों और बड़प्पन से टूटते हुए परिवार को बचा लिया।